नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने के चलन को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह चलन संविधान का उल्लंघन नहीं करता।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने 'पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी' द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा, ''यह सिर्फ एक (पद का) नाम है और भले ही आप किसी को उपमुख्यमंत्री कहते हैं, इससे दर्जा नहीं बदलता।''
पीठ ने कहा, ''सबसे पहले और सबसे जरूरी बात यह है कि एक उपमुख्यमंत्री राज्य सरकार में मंत्री होता है और इससे संविधान का उल्लंघन नहीं होता।''
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य उपमुख्यमंत्री नियुक्त करके गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। पीठ ने कहा कि ऐसी नियुक्तियां किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करतीं।

More Stories
Divyastra MK3 की पहली टेस्ट फ्लाइट सफल, स्वदेशी जेट इंजन से उड़ने वाला भारत का नया ‘सुसाइड ड्रोन’ तैयार
Vande Bharat बनी रेलवे की ‘Cash Cow’, 162 ट्रेनों ने बढ़ाया मुनाफा; 3.98 करोड़ यात्रियों ने किया सफर
महंगे हवाई टिकट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- किराया नहीं घटा सकते तो उड़ानें रोकने पर करें विचार