भोपाल
स्वच्छता एक संकल्प है, जिसे मध्यप्रदेश में एक जन आंदोलन बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता संकल्प को प्रदेश ने आत्मसात किया है। स्वच्छता आंदोलन के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। हर वर्ष की तरह दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छता प्रतियोगिता स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 जारी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रदेश के शहर बहुत गंभीरता के साथ अपनी भागीदारी कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान भारत सरकार की सर्वेक्षण टीमें आकर शहरों में स्वच्छता व्यवस्थाओं का जायजा लेती हैं। इसमें स्वच्छता की आधारभूत तैयारियों का परीक्षण, खुले में शौच से मुक्ति और मल-जल का निस्तारण (ओडीएफ++ और वॉटर+) कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग (1,3 5 व 7 स्टार रेटिंग) सहित कुल तीन परीक्षण किए जाते हैं। अभी प्रदेश में आधारभूत तैयारियों का परीक्षण जारी है, जिसमें 269 शहरों में परीक्षण पूर्ण हो चुका है, शेष शहरों के परीक्षण के लिये टीमें पहुँच रही हैं। इसके बाद ओडीएफ++ और स्टार रेटिंग के परीक्षण शुरू होंगे।
उल्लेखनीय है की मध्यप्रदेश के नगरीय निकाय वर्ष भर शहरी स्वच्छता को सँवारने में जुटे रहते हैं। प्रदेश में नियमित कचरा संग्रहण, परिवहन और निपटान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है। जिसके माध्यम से शहरों की स्वच्छता सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ खुले में शौच पर प्रतिबंध को सफल बनाने के बाद शहरों को ओडीएफ़++ और वॉटर+ प्रमाण-पत्र दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग प्रदेश के नागरिकों, युवाओं और जन-प्रतिनिधियों से शहरों को स्वच्छ बनाने में सहयोग की निरंतर अपील कर रहा है। शहरों का बदला हुआ स्वरूप शासन के प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित कर रहा है।

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