बिलासपुर
गंगरेल बांध में मछली और पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए पेश जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में राज्य शासन के मत्स्य विभाग ने जवाब पेश कर बताया कि 779 में से से 679 केज हटा दिए गए हैं. अब सिर्फ 100 केज हटाना बाकी है. इस मामले में चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी.
धमतरी की वाइल्ड लाइफ वेलफेयर सोसायटी ने जनहित याचिका लगाई है, जिसमें आरोप लगाया है कि, गंगरेल जलाशय में बिना वैध अनुमति के पिंजरों के जरिए बड़े पैमाने पर मछलियों का शिकार किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है. याचिकाकर्ता का कहना है कि, शासन ने छह माह पूर्व ही इस अवैध गतिविधि को रोकने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया था कि जलाशय के लाभार्थियों ने जिला मजिस्ट्रेट-सह-कलेक्टर,धमतरी के समक्ष आवेदन देकर अपने पिंजरों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की, जिला धमतरी ने 24 फरवरी 2025 को कार्यपालक अभियंता, जल प्रबंधन संभाग को पत्र लिखकर पिंजरों के स्थानांतरण के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने का अनुरोध किया था. उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी इस संबंध में अभियंता से भेंट की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका.इसकी जानकारी निदेशक (मत्स्य पालन) को भेजी गई थी. शपथपत्र में कहा गया कि फुटाहामुड़ा क्षेत्र, जो एक आर्द्रभूमि है, उसमें कुल 774 पिंजरे लगाए गए हैं और अधिकांश किसानों ने इन्हें स्थानांतरित करने पर सहमति जता दी है, जैसे ही सिंचाई विभाग उपयुक्त स्थान चिन्हित करेगा, पिंजरों का स्थानांतरण कर दिया जाएगा.
आज हुई सुनवाई में मत्स्य विभाग ने कोर्ट को बताया कि, ज्यादातर केज हटा दिए गए हैं, जहां मछलियों का शिकार किया जा रहा था.अब मात्र 100 केज ही बचे रह गए हैं. धीरे धीरे इन्हें भी पूरा हटा लिया जाएगा. यह सुनने के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने 4 सप्ताह बाद अगली सुनवाई निर्धारित कर दी है.

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