रायपुर
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद शायद अब कांग्रेस नेता यह मानकर चल रहे हैं कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है,तभी तो वे दिल्ली जाकर वे पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। कोई भी सीट ऐसी नहीं हैं जहां पर एक नाम तय हो सके। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नाम पर बस्तर के ही वरिष्ठ विधायक कवासी लखमा ने मोर्चा खोल दिया है, कुछ पूर्व विधायकों व नेताओ को लेकर वे दिल्ली पहुंच गए हैं और हरीश लखमा को टिकट देने की मांग कर रहे हैं।
दो टूक कह दिया है कि जो विधानसभा नहीं जीत पाए वह लोकसभा क्या जीतेंगे? वहीं कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत के नाम का भी अब विरोध होने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री व कुछ हारे हुए मंत्रियों पर आलाकमान दबाव बना रही है कि वे चुनाव लड़े। जैसे तैसे कांग्रेस को छत्तीसगढ़ से कुछ सीट की उम्मीद है इसलिए वह हर सीट व हर नाम पर गहन विचार कर रही है। लेकिन छत्तीसगढ कांग्रेस के नेता है कि खुलकर विरोध और समर्थन पर उतर आए हैं। सूबे में कांग्रेस नेताओं की खेमेबंदी ने टिकट को लेकर घमासान मचा दिया है। ऐसे में टिकट मिल भी गई तो जीतने की गारंटी कौन लेगा?

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