ग्रिड फेल की स्थिति में बहु-सबस्टेशन सिस्टम रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण
भोपाल
प्रदेश के ट्रांसमिशन ग्रिड की आपातकालीन तैयारियों, सिस्टम रिस्टोरेशन क्षमता तथा बहु-स्तरीय समन्वय को परखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन जिला सिवनी में एक अत्यंत जटिल ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल सफलतापूर्वक पूरी की गई। यह अभ्यास पेंच हाइडल पावर हाउस के तकनीकी समन्वय से संपन्न हुआ।
बहु-सबस्टेशन ग्रिड रिस्टोरेशन बना चुनौतीपूर्ण अभ्यास
एम पी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री प्रदीप सचान के अनुसार इस अभ्यास में सामान्य मॉकड्रिल की तुलना में कहीं अधिक जटिलता रही, क्योंकि इसमें चरणबद्ध रूप से कई सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया। मॉकड्रिल के दौरान पेंच पावर हाउस से 132 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी, वहां से 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी तथा आगे 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन तक विद्युत आपूर्ति को पूरी तरह नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से बहाल किया गया।
इस मॉकड्रिल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि पूरे जटिल अभ्यास के दौरान 33 के.व्ही. फीडरों पर केवल 25 मिनट के सीमित व्यवधान में पूरे सिस्टम के रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण किया गया।
उत्कृष्ट समन्वय से मिली सफलता
मॉकड्रिल के दौरान स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एस.एल.डी.सी.) जबलपुर, कंट्रोल रूम तथा फील्ड स्टाफ के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा। सामान्यतः ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल में एक या दो सबस्टेशनों तक ही अभ्यास सीमित रहता है, जबकि इस मॉकड्रिल में तीन प्रमुख सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया, जो तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण है।
ऐसे की गई ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल
एम.पी. ट्रांसको सिवनी के कार्यपालन अभियंता श्री अरुण कुमार वैद्य ने बताया कि ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल को वास्तविक ग्रिड फेल्योर जैसी परिस्थितियों के अनुरूप चरणबद्ध ढंग से संपन्न किया गया । सबसे पहले धीरे-धीरे लखनादौन सबस्टेशन का लोड बरगी पावर हाउस से बंद कर पेंच पावर हाउस पर स्थानांतरित किया गया। इसके पश्चात नियंत्रित लोड की स्थिति में जनरेटर को क्रमिक रूप से बंद कर वास्तविक ब्लैकआउट जैसी स्थिति उत्पन्न की गई। इसके बाद जनरेटर को पुनः चालू कर सावधानीपूर्वक लोड बढाते हुये चरणबद्ध रूप से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन में सामान्य विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान वोल्टेज एवं फ्रिक्वेंसी नियंत्रण, सिस्टम स्थिरता तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया।

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