इंदौर
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। शुक्ल ने साथ ही ये भी बताया है कि सरकार पूरी तरह से मुस्तैद है। शुक्ला ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में पर कड़ी नजर रख रही है और प्रभावित लोगों के बेहतर इलाज के लिए अबतक सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।
इस मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं, मरीजों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं और डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं। वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बीते तीन दिनों से इंदौर में हैं। सरकार सभी सभी प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज मुहैया करवा रही है और साथ ही पानी दूषित होने के कारणों की गहन जांच कर रही है। सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए और ऐसी घटना दोबारा न हो इसके के लिए स्वास्थ्य और नगर निगम अफसरों के साथ मिलकर काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने साथ ही ये भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि मामले में इससे पहले इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी के दूषित होने का संकेत मिलने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अधिकारी जमीनी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। वर्मा ने कहा, 'शुरुआती जांच से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पानी दूषित है, लेकिन हम और जानकारी जुटा रहे हैं। हमने 13 मरीजों को भर्ती कराया है। हमारी सर्वे टीम घर-घर जाकर लोगों में लक्षणों की जांच कर रही है। हम हर जगह क्लोरीन की गोलियां बांट रहे हैं।' उन्होंने कहा कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने साथ ही ये भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने मुताबिक फिलहाल प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 71 को छुट्टी दे दी गई है। मरीजों की संख्या में कमी आई है और जो भी बीमार पाया जा रहा है उसका इलाज किया जा रहा है। सभी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है और जिन्होंने पैसा जमा किया है उन्हें रिफंड कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वत:संज्ञान लिया है।
आपको बता दें कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया था। मामले पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि, 'करीब 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए हैं।'

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