इंदौर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार को चीनी मांझे पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि यदि कोई नाबालिग प्रतिबंधित चीनी मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है, तो उसके अभिभावकों को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जनता के बीच व्यापक प्रचार किया जाए कि चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग से, अगर कोई घायल होता है या किसी की मृत्यु होती है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
अदालत ने 11 दिसंबर 2025 को चीनी मांझे से हुई मौतों और हादसों को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं और हादसों से बचाव के लिए कई एहतियाती उपाय लागू किए जा रहे हैं. सरकार ने यह भी कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे.
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ BNS, 2023 की धारा 106(1) (आईपीसी की धारा 304-ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. साथ ही, यदि कोई नाबालिग चीनी नायलॉन धागे का उपयोग करता है, तो उसके अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
सुनवाई के दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने अदालत को बताया कि निर्देशों के पालन में प्रशासन जल्द आदेश जारी करेगा, जिन्हें पड़ोसी जिलों में भी तत्काल प्रसारित किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से गला कटने की दो अलग-अलग घटनाओं में 16 वर्षीय किशोर और 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है. प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद पतंगबाज प्रतिद्वंद्वियों की पतंग काटने के लिए अब भी इस खतरनाक मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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