मुंबई
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल या शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के शराब उद्योग पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ने लगा है। देश की कई बड़ी शराब और बीयर कंपनियों ने राज्य सरकारों से कीमतें बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बोतल, कैन, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि अब इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर और वाइन की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है।
देश की प्रमुख इंडस्ट्री संस्था (Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies-CIABC) और (Brewers Association of India) ने कई राज्यों को पत्र लिखकर राहत की मांग की है। बीयर कंपनियों के संगठन BAI ने सरकारों से 15% से 20% तक कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है ताकि बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम किया जा सके। संगठन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी (Vinod Giri) के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट के बाद ग्लास बोतलों की कीमत करीब 20% तक बढ़ गई है, जबकि पेपर कार्टन लगभग दोगुने महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा LDPE, BOPP और चिपकाने वाले मटेरियल्स की कीमतों में भी 20-25% तक की बढ़ोतरी हुई है।
सबसे ज्यादा दबाव ग्लास उद्योग पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब में गैस सप्लाई कम होने से कई फैक्ट्रियां संकट में हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें अब महंगे LNG और LPG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। बीयर कंपनियों के सामने एल्यूमीनियम कैन की कमी भी बड़ी चुनौती बन रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट से एल्यूमीनियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में कैन और ग्लास की भारी कमी हो सकती है।
इस संकट का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट और फ्रेट लागत भी करीब 10% बढ़ चुकी है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है। अनंत एस अय्यर (Anant S Iyer) का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने शराब उद्योग पर महंगाई का बड़ा दबाव बना दिया है। कंपनियों ने सरकारों से अंतरिम राहत के तौर पर टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग लेवी में कटौती की भी मांग की है। अगर सरकारें कीमत बढ़ाने की अनुमति देती हैं, तो आने वाले समय में बीयर, व्हिस्की और वाइन जैसी शराबों के दाम आम ग्राहकों के लिए और महंगे हो सकते हैं।

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