भोपाल
जापान में होने वाले आगामी एशियन गेम्स को लेकर मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अब तक 19 स्थान पक्के कर लिए हैं. इस बार एथलेटिक्स, शूटिंग और वाटर स्पोर्ट्स जैसे खेलों में राज्य की दावेदारी सबसे मजबूत दिख रही है. प्रदेश के 50 संभावित खिलाड़ियों में से 19 ने मुख्य सूची में जगह बना ली है, जबकि 30 खिलाड़ियों को अभी भी रिजर्व रखा गया है।
वाटर स्पोर्ट्स में दबदबा, कैनो स्लैलम में रिकॉर्ड 9 चयन
मध्य प्रदेश की वाटर स्पोर्ट्स टीम ने इस बार इतिहास रच दिया है. सबसे ज्यादा सफलता कैनो स्लैलम स्पर्धा में मिली है, जहां एक साथ 9 खिलाड़ियों ने क्वालिफाई किया है. इनमें विशाल केवट, पल्लवी जगताप, भरत केवट, हितेश केवट, शिखा चौहान, विशाल वर्मा, प्रद्युमन सिंह राठौड़, भूमि बघेल और रीना सेन शामिल हैं. इसके अतिरिक्त कयाक एंड कैनो में प्रोहित बारोई ने भी अपनी जगह सुरक्षित की है।
शूटिंग और एथलेटिक्स में भी चमके सितारे
शूटिंग में प्रदेश के स्टार शूटरों से एक बार फिर पदक की उम्मीदें हैं. रायफल कैटेगरी से ऐश्वर्य प्रताप सिंह और आशी चौकसे ने क्वालिफाई किया है, जबकि शॉटगन कैटेगरी से नीरु ठंडा और मनीषा कीर ने अपना स्थान पक्का किया है. वहीं एथलेटिक्स की बात करें तो शाटपुट (गोला फेंक) में समरदीप सिंह ने दमदार प्रदर्शन किया है. पोल वाल्ट स्पर्धा में देव मीणा और निकिता आकरे ने देश का प्रतिनिधित्व करने की पात्रता हासिल की है।
समान अवसर की मिसाल, ब्लाइंड जूडो में कपिल परमार
चयन प्रक्रिया की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग को समान अवसर दिए गए. इसी कड़ी में दिव्यांग वर्ग से आने वाले कपिल परमार ने ब्लाइंड जूडो में क्वालिफाई कर प्रदेश का मान बढ़ाया है. वहीं एशियन गेम्स के पिछले संस्करणों की बात करें तो मध्य प्रदेश के इन खिलाड़ियों का ट्रैक रिकार्ड शानदार रहा है. ग्वांगझू एशियन गेम्स में ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था. वहीं महिला शूटर आशी चौकसे ने भी दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया था।
दो महीने की स्पेशल ट्रेनिंग और फिटनेस का दिखा असर
कोच जेपी सिंह के अनुसार "इस बड़ी सफलता के पीछे खेल विभाग की दो महीने की कड़ी मेहनत है. विभाग ने विभिन्न अकादमियों से शार्टलिस्ट किए गए खिलाड़ियों की फिटनेस, फार्म और तकनीक को सुधारने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी. हर खिलाड़ी की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग शेड्यूल डिजाइन किया गया था, जिसका सकारात्मक परिणाम आज सबके सामने है।

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