लखनऊ
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की कृषि संपदा, खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और जापान की अत्याधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, भारत में जापान के राजदूत, जापानी प्रतिनिधिमंडल, उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश वैश्विक पटल पर अपने उत्कृष्ट उत्पादों और अपार संभावनाओं के साथ पूरी तरह तैयार है। प्रदेश का विशाल बाजार सभी निवेशकों और उद्यमियों के स्वागत के लिए खुला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में निवेश का स्वर्णिम युग प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि आज हम सभी यहां बैठकर इस ऐतिहासिक साझेदारी की ठोस कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा एक स्पष्ट संकल्प है कि विश्व की कोई भी ऐसी डाइनिंग टेबल न हो, जहां भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का कोई न कोई कृषि या खाद्य उत्पाद मौजूद न हो। सभी उद्यमियों में वह सामर्थ्य है और इसी सामर्थ्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए जापानी मित्र आज हमारे बीच उपस्थित हैं।
व्यापार से आगे विश्वास और संस्कृति का संबंध
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार और तकनीक तक सीमित नहीं हैं। यह संबंध विश्वास, साझा संस्कृति और आत्मीयता की सुदृढ़ नींव पर टिके हैं। वर्ष 2027 में दोनों देशों के इन सौहार्दपूर्ण कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। भगवान बुद्ध की पावन शिक्षाएं दोनों देशों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती हैं। भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश उत्तर प्रदेश के सारनाथ में दिया था, जो आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है। जापान में बुद्ध के अनुयायियों की अपार श्रद्धा यह सिद्ध करती है कि दोनों देशों की सांस्कृतिक जड़ें एक हैं।
जापानी तकनीक और यूपी की कृषि शक्ति का होगा समन्वय
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधन, मेहनती अन्नदाता और सबसे बड़ा युवा कार्यबल है। यदि इसके साथ जापान की अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार का समन्वय हो जाए तो उत्तर प्रदेश के उत्पाद दुनिया के कोने-कोने तक अपनी पहचान बनाएंगे।
कृषि पर निर्भर 65 प्रतिशत आबादी, फूड प्रोसेसिंग पर जोर
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि फूड प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, उनकी आय में भारी वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद सुदृढ़ खाद्य प्रसंस्करण नीति लागू की गई, जिसे वर्ष 2023 में और अधिक व्यावहारिक तथा आकर्षक बनाया गया। आज उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जो खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए भारी कैपिटल सब्सिडी, मंडी शुल्क में छूट और व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रहा है। महिलाओं के नेतृत्व में स्थापित होने वाली इकाइयों के लिए सोलर पावर पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का काम कर रहे हैं। हर ब्लॉक और तहसील स्तर पर आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त लैंड बैंक, 24 घंटे विद्युत आपूर्ति और देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रेस-वे व लॉजिस्टिक्स नेटवर्क उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि चाहे लखनऊ हो, वाराणसी, कुशीनगर या निर्माणाधीन जेवर (नोएडा इंटरनेशनल) एयरपोर्ट, उत्तर प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पूरी दुनिया से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। टोक्यो से चलने वाला निवेशक सीधे उत्तर प्रदेश में उतरकर अपना कारोबार संचालित कर सकता है। उत्तर प्रदेश के पास 'काला नमक चावल' जैसी ऐतिहासिक और अनूठी धरोहर है, जिसे 'बुद्ध राइस' के नाम से भी जाना जाता है। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर रही हैं।
जापानी निवेशकों को सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था का भरोसा
उपमुख्यमंत्री ने जापानी निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में उन्हें सर्वश्रेष्ठ कानून-व्यवस्था, पूर्ण सुरक्षा और पारदर्शी सिंगल-विंडो सिस्टम मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि उत्तर प्रदेश की कृषि संपदा और जापान की तकनीक को मिलाकर इस राज्य को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनाया जाए।
जापान ने यूपी को दीर्घकालिक खाद्य और विनिर्माण साझेदार के रूप में देखा
भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और मानव संसाधन विकास में जापान–उत्तर प्रदेश सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। ओनो केइची ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि शक्ति, औद्योगिक आधार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। हमें ऐसी व्यावहारिक साझेदारियां विकसित करनी चाहिए, जो तकनीक, निवेश और कौशल को स्थानीय अवसरों से जोड़ें और दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण करें
किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भारत के प्रति जापान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि जापानी कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पादों को ढालना होगा। उन्होंने भारत में जापानी और पैन-एशियन व्यंजनों की बढ़ती स्वीकार्यता तथा बीटूबी से बीटूसी बाजारों में विस्तार की संभावनाओं का उल्लेख किया। कोसाटो ने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत पड़ोसी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए संभावित निर्यात केंद्र बन सकता है। सत्र में गोल्डी ग्रुप के निदेशक सुदीप गोयनका और अमूल (बनास डेयरी) के यूपी ऑपरेशंस प्रमुख दिनेश कुमार चौधरी समेत अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।

More Stories
मंत्री कुशवाह ने एमपी एग्रो के पदोन्नत कर्मियों को दी हार्दिक बधाई
मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों का हुआ 10 वर्ष बाद नवीन वर्गीकरण
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग के लिए जापानी टीम आएगी यूपी, नई प्रौद्योगिकी में साझेदारी को मिलेगा विस्तार