August 25, 2026

स्वराज ख़बर

आज की ताज़ा ख़बर

वर्तमान समय में स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सभी क्षेत्रों में सशक्त हो रहा है। भारत के पास अपने सामर्थ्य से हर प्रकार की चुनौती से निपटने की क्षमता है। जिस प्रकार रामायण में जामवंत ने समुद्र लांघने के लिए हनुमान जी को उनकी शक्ति से परिचित कराया था, उसी प्रकार प्रधानमंत्री  मोदी ने भारत को उसके सामर्थ्य से परिचित कराया है। आज स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनामी। हमारी संस्थाओं को कौशल, शोध, नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बनना होगा। पब्लिकेशन से लेकर पेटेंट तक, पेटेंट से प्रोटोटाइप तक और प्रोटोटाइप से लेकर एंटरप्राइज की इकोनामिक और नॉलेज वैल्यू चैन की स्थापना करनी होगी। मध्यप्रदेश अवसरों की धरती है और प्रतिभाशाली युवा, प्राकृतिक संसाधन, कृषि शक्ति, उद्यमशीलता और औद्योगिक क्षमता हमारे संसाधन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीटयूशन्स फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्जलित कर कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया।

“वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” रही कॉन्क्लेव की थीम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर स्मारिका-समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047 केन्द्रीय संस्थाओं का सम्मेलन विमोचन किया। कॉन्क्लेव अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा आयोजित किया गया। “वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस” की थीम पर आयोजित कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश में स्थित केन्द्रीय संस्थाओं की समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 के लक्ष्य प्राप्ति में भागीदारी और सहभागिता सुनिश्चित करना है। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में विभिन्न संस्थाओं के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ।

संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर एकत्र होना मध्यप्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। इससे संस्थानों को अपनी उपलब्धियां, विशेषज्ञता और भविष्य की योजनाएं साझा करने के साथ प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप योगदान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि संस्थानों में उपलब्ध ज्ञान और तकनीक का लाभ प्रयोगशालाओं और परिसरों तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। “एक संस्थान–एक संकल्प” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के भविष्य के निर्माण की कार्ययोजना है। प्रत्येक संस्थान प्रदेश के विकास से संबंधित ऐसा व्यावहारिक संकल्प ले, जिसे निश्चित समय-सीमा में धरातल पर उतारा जा सके। राज्य सरकार इन संकल्पों और नवाचारों को क्रियान्वित करने में पूरा सहयोग प्रदान करेगी।

स्पष्ट दृष्टि और सामूहिक इच्छाशक्ति से समस्याओं का समाधान संभव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों ने विपरीत परिस्थितियों से उभरकर ज्ञान, अनुशासन और तकनीकी क्षमता के आधार पर उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान भारत भी रक्षा, अंतरिक्ष, विज्ञान, डिजिटल तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। आधुनिक तकनीक ने देश की सीमाओं की सुरक्षा और विभिन्न चुनौतियों से निपटने की हमारी क्षमता को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ परस्पर सहयोग भी आवश्यक है। प्रत्येक राज्य आगे बढ़ेगा, तभी भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। राजस्थान के साथ वर्षों से लंबित जल संबंधी विषयों को संवाद और सहयोग से आगे बढ़ाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पष्ट दृष्टि और सामूहिक इच्छाशक्ति से जटिल समस्याओं का भी समाधान संभव है।

युवाओं के कौशल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन, भूमि, युवा शक्ति और संस्थागत क्षमता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं के कौशल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए। केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थान कौशल विकास, अनुसंधान, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, उद्योग और नवाचार के क्षेत्रों में मिलकर कार्य करें। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश का संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित होगा।उन्होंने कहा कि शासन, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योगों के बीच प्रभावी समन्वय से मध्यप्रदेश ज्ञान एवं नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। संस्थानों द्वारा किए जाने वाले अनुसंधान प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के समाधान और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले होने चाहिए।

विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में सहभागी सभी संस्थानों के प्रतिनिधियों का अभिनंदन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके अनुभव, ज्ञान और संकल्प से “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” की परिकल्पना को नई गति मिलेगी तथा विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

अगली पीढ़ी को सर्वश्रेष्ठ सौंपना है

मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 विजन डॉक्यूमेंट विकसित भारत का एक लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री  मोदी ने सप्त संकल्प बताए हैं। मध्यप्रदेश तकनीक और नवाचारों में अग्रणी राज्य है। वर्ष 2047 के लिए प्रदेश के विकासोन्मुख सभी प्रयासों को एक सूत्र में बांधना हमारा लक्ष्य है। इसमें सिविल सोसाइटी, उद्यमी, संस्थानों और हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। जब कोई विकासशील राज्य, विकसित राज्य के लक्ष्य की ओर बढ़ता है तो उसे हर क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और परिणामूलक कार्यों की आवश्यकता होती है। हम ऐसे बड़े लक्ष्य तय करें, जो हमें अपने सेक्टर में ग्लोबल लीडर बनाए। वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बहुत अधिक फोकस है, हमें हमारे युवाओं को एआई की चुनौती का सामना करने के उद्देश्य से कौशल सम्पन्न बनाना होगा। सभी केन्द्रीय संस्थान अपने-अपने क्षेत्र में संकल्प लें और परिणाम देने के उद्देश्य से कार्य करें। विकसित मध्यप्रदेश की जिम्मेदारी सिर्फ शासन की नहीं, बल्कि हम सभी की है। यह ध्यान रखे कि हमारी अगली पीढ़ी, इस पीढ़ी के प्रयासों का मूल्यांकन करेगी और यह आकलन भी करेगी कि उसे क्या सौंपा गया। हमें अपनी अगली पीढ़ी को सर्वश्रेष्ठ सौंपना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, विकास के नए सौपान अर्जित करेगा

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष  प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन ने पिछले साल समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था। यह प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के विजन को मजबूती प्रदान करता है। मध्यप्रदेश चयनित 15 से अधिक प्रमुख सेक्टर में कार्य करते हुए विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस श्रेणी में कृषि, वानिकी, ग्रामीण विकास, नवकरणीय ऊर्जा, टेक्नोलॉजी एंड साइंटिफिक रिसर्च, डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक इंस्टीट्यूशन मैनेजमेंट, ह्यूमैनिटी, एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट, डिजाइन, डेवलपमेंट एंड कल्चर और स्पोर्ट्स शामिल हैं। सभी के प्रतिनिधि इस कॉन्क्लेव में मौजूद हैं। इसमें राज्य के 60 से अधिक संस्थाएं शामिल हैं। इस क्रम में नॉलेज डिपॉजेटरी पोर्ट्ल आरंभ किया जाएगा, जिस पर संस्थाएं अपने विचार साझा कर सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के नित नए सौपान अर्जित करेगा।

केंद्रीय संस्थान के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के समग्र विकास के संबंध में रखें विचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस सत्र को सुशासन संस्थान के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर  संतोष कुमार विश्वकर्मा ने मॉडरेट किया। प्रतिनिधियों ने सेमीकंडक्टर तकनीक, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, होम स्टे प्रशिक्षण, शारीरिक शिक्षण और खेलों के लिए प्रशिक्षण, क्रिटिकल एलिमेंट्स पर शोध, गांवों में स्मार्ट विलेज बनाने के क्षेत्र में गतिविधियां संचालित करने और प्रदेश के समग्र विकास के बारे में विचार रखे। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के निदेशक  स्वरोचित सोमवंशी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, केंद्रीय संस्थानों के निदेशक और प्रतिनिधि, विश्वविद्यालयों के कुलगुरु सहित बड़ी संख्या में नीति-निर्माता और विद्वान उपस्थित थे।

13 एमओयू हुए

कॉन्क्लेव में प्रदेश में शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ 13 एमओयू किए गए। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई) ग्वालियर, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल, आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) भोपाल, अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (एबीवी-आईआईआईटीएम) ग्वालियर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) भोपाल, सीएसआईआर-उन्नत सामग्री एवं प्रक्रिया अनुसंधान संस्थान (एएमपीआरआई) भोपाल, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) भोपाल, राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) भोपाल तथा प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंदौर शामिल हैं। इसके साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल और डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के बीच भी एमओयू हुआ।