इस्लामाबाद
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है। सरकार और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के खिलाफ आम आदमी का गुस्सा फूट चुका है और वे सड़कों पर उतर चुके हैं। पीओके के मीरपुर में दुकानें, बाजार और स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। दरअसल महंगाई से त्रस्त जनता ने जब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला तो पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने भीड़ का दमन शुरू कर दिया। हिंसा इतनी बढ़ी की गोलियां चल गईं और कम से कम दो नागरिकों की जान चली गई। वहीं एक पुलिस अधिकारी की भी मौत हो गई। इसके बाद से पीओके में तनाव चरम पर है।
आवामी ऐक्शन कमेटी(AAC) ने शुक्रवार को पीओके में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया था। मुजफ्फराबाद में 20 मई को बंद का आह्वान किया गया। एएसी की कोशिश थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो। यह प्रदर्शन हाई टैक्स, बिजली के बिल और महंगाई में हो रही बढ़ोतरी को लेकर था। इसी बीच पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस के गोलेछोड़े। मस्जिद और घरों में भी आंसू गैस के गोले छोड़ दिए गए।
इसके बाद यह प्रदर्शन पीओके के दूसरे हिस्सों मे भी फैल गया। समाहनी, सेहंसा, मीरपुर, रावलकोट, तत्तापानी और हट्टियन बाला के लोग भी सड़क पर उतर आए। पुलिस ने सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प हो गई। पुलिस ने शनिवार को कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पीओके की सरकार ने धारा 144 लगा दी। शनिवार को भी पीओके में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया।
वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह से पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज किया। इसमें दर्जनों प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। पीओके के ऐक्टिविस्ट अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि पाकिस्तानी पुलिस बुल निहत्थे लोगों पर गोली चला रही है। इस झड़प में कम से कम दो की मौत हो गई। वहीं हिंसा में एक एसएचओ भी मारा गया। मिर्जा ने कहा कि इस मामले मे में भारत की सरकार को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा, यहां स्थिति बेकाबू हो रही है। उन्होंने कहा कि अब गिलगित और बाल्टिस्तान को आजादी मिलनी जरूरी है।

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