इंदौर
इंदौर ने देश के सबसे सुरक्षित शहर होने की दिशा में भी कदम बढ़ा दिया है। इस व्यवस्था में तकनीक से हाथ मिलाया जा रहा है और निगरानी की जिम्मेदारी 56 हजार से ज्यादा कैमरे की आंखों को सौंपी जाएगी। शहर में विभिन्न स्थानों पर अब सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि अपराध पर काबू पाया जा सके। इन कैमरों की निगरानी भी की जाएगी और बंद होने पर तुरंत सूचित भी किया जाएगा। शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने इंदौर के लिए सामुदायिक निगरानी सिस्टम को अनुमति देते हुए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इंदौर शहर में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए मप्र नगर पालिक निगम एक्ट 1956 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की उप विधियां बनाई गई हैं और उन्हें लागू किया गया है। बाद में यह प्रविधान अन्य महानगरों में भी लागू किया जाएगा।
100 से ज्यादा लोग इकट्ठे होने वाली जगह पर कैमरा लगाना अनिवार्य
इसके बाद अब ऐसे स्थान जहां एक समय में 100 से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने की संभावना है वहां सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य होगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की पहल पर एमआईसी बैठक में इस बारे में प्रस्ताव स्वीकृत कर भोपाल भेजा गया था। शुक्रवार को इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई।
सड़क की ओर मुंह करते हुए लगाना होंगे कैमरे
1500 वर्गफीट या अधिक क्षेत्रफल वाले व्यवासायिक संस्थान में सड़क की ओर मुंह करते हुए कैमरे लगाना होंगे। पार्किंग में भी कैमरे लगाना होंगे। महापौर ने बताया कि इसे लेकर जल्द ही रहवासी संघों, व्यवसायिक संगठनों, औद्योगिक संगठनों से चर्चा करेंगे। ऐसी सभी सभाएं और आयोजन जिसमें एक हजार या अधिक लोग है वहां भी सीसीटीवी लगाना होंगे। रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखना होगी। शहर में कैमरे लगाने से भीड़ भरे स्थानों पर निगाह रखी जा सकेगी। इसके साथ ही इससे अपराधों पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी।

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