रुद्रप्रयाग
केदारनाथ धाम के कपाट आज भैया दूज के मौके पर पूजा अर्चना के बाद बंद कर दिए गए हैं। सुबह मंदिर में भगवान की समाधि पूजा की गई और उसके बाद 6 बजे गर्भ ग्रह का दरवाजा बंद कर दिया गया। बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे। जबकि विधि विधान के साथ 8:30 बजे मंदिर का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। बड़ी संख्या में भक्तों के साथ बाबा केदार की चल विग्रह डोली को केदारनाथ धाम से ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए रवाना कर दिया गया।
आज डोली रामपुर पहुंचेगी, जबकि कल सोमवार को डोली गुप्तकाशी और मंगलवार 5 नवंबर को डोली शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पहुंचेगी। जहां भगवान की 6 महीने तक शीतकालीन पूजा अर्चना की जाएगी। आपको बता दें कि आज 3 नवंबर को यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर बाद श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे, जबकि 2 नवंबर को गंगोत्री धाम के कपाट को बंद कर दिया गया था।
बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को होंगे बंद
बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए 17 नवम्बर को रात्रि 9 बजकर 7 मिनट पर बंद होंगे। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से पूर्व श्रद्धालु भगवान के दर्शन करना चाहते हैं। इसलिए अक्तूबर से लेकर अभी तक प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। शनिवार को भी 6500 से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ पहुंचे। पुलिस प्रशासन द्वारा दिए आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार तक बदरीनाथ में यात्रा अवधि में 12 लाख 74 हजार से अधिक यात्री बदरीनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे।
पहाड़ में इस समय मौसम खुशगवार है। इसलिए बदरीनाथ सहित सभी मंदिरों में भारत ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु बदरीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व प्रकृति और भगवान दोनों के दर्शन के लिए यहां आ रहे हैं। आम और खास सब भगवान के दरबार में माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं।

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