नई दिल्ली.
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और चार राज्यों को नोटिस जारी कर गोट्टिकोया आदिवासियों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है। माओवादी हिंसा की वजह से छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए मजबूर हुए आदिवासी फिलहाल महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में खराब हालात में रहने को मजबूर हैं। इसके चलते इन पड़ोसी राज्यों में उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ भी नहीं मिल पा रहे हैं।
आयोग ने अनुरोध किया है कि गृह मंत्रालय का एक सचिव स्तर का अधिकारी और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव 9 दिसंबर को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुलाकात करें और समुदाय को जरूरी मदद मुहैया कराने के लिए जल्द नीतिगत फैसला लें। मंत्रालय को शुक्रवार को भेजी गई चिट्ठी में आयोग ने कहा है कि उसे मार्च 2022 को एक याचिका मिली थी। इसमें गोट्टिकोया समुदाय के लोगों के 2005 में ही छत्तीसगढ़ छोड़ने और पड़ोसी राज्यों में बसने की बात कही गई थी। इसका कारण माओवादी गुरिल्लाओं की तरफ से हिंसा को बताया गया था। याचिका में कहा गया था कि नई जगहों पर इस समुदाय के लोगों को काफी चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं। आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, करीब 50 हजार आदिवासी वामपंथी कट्टरवाद के चलते उस दौरान छत्तीसगढ़ को मजबूर हुए थे। वे अब ओडिशा के जंगलों में, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 248 जगहों पर रहने को मजबूर हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेलंगाना सरकार ने राज्य में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से 75 जगहों पर जमीन वापस ले ली है। इससे आदिवासियों की हालत और जीजीविषा पर नकारात्मक असर पड़ा है।

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