सिडनी
जसप्रीत बुमराह को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 32 विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया है। बुमराह सीरीज के पहले और अंतिम टेस्ट में बतौर कप्तान खेलने के लिए उतरे थे। हालांकि अंतिम टेस्ट मैच में वह फिटनेस के कारण गेंदबाजी नहीं कर पाए और इस पर उन्होंने निराशा व्यक्त की है। भारत ने यह सीरीज 1-3 से गंवा दी। सिडनी टेस्ट में मिली हार के बाद बुमराह ने कहा कि वह तीसरे दिन गेंदबाजी न कर पाने से थोड़े निराश थे। उन्होंने उस दिन की पिच को सीरीज की सबसे चुनौतीपूर्ण पिच बताया।
हालांकि बुमराह ने यह भी कहा कि शरीर का ध्यान रखना जरूरी है, खासकर जब उन्हें दूसरे दिन पीठ में तकलीफ महसूस हुई और स्कैन करना पड़ा। उनकी गैरमौजूदगी में भारत को 162 रन बचाने का मौका गंवाना पड़ा, और ऑस्ट्रेलिया ने 6 विकेट से मैच जीतकर ट्रॉफी 3-1 से अपने नाम कर ली।
बुमराह ने मैच के बाद कहा, "थोड़ा निराश हूं, लेकिन कभी-कभी शरीर की बात माननी पड़ती है। उससे लड़ नहीं सकते। मुझे सीरीज की सबसे चुनौतीपूर्ण पिच पर गेंदबाजी करना अच्छा लगता, लेकिन पहली पारी के बाद पीठ में थोड़ी तकलीफ थी।"
तीसरे दिन टीम के मूड पर बुमराह ने कहा, "टीम में बातचीत विश्वास को लेकर थी। बाकी गेंदबाजों ने पहली पारी में भी शानदार प्रदर्शन किया। सुबह भी हमने एक-दूसरे को विश्वास दिलाया। पूरी सीरीज कड़ी टक्कर वाली रही। आज भी हम मैच में थे, ऐसा नहीं कि सब कुछ एकतरफा था। जो टीम अंत तक धैर्य रखती और एकजुट रहती है, वही जीतती है। यह एक शानदार सीरीज थी।"
सीरीज से सीखे गए सबक पर बुमराह ने कहा, "लंबे समय तक खेल में टिके रहना, दबाव बनाना और सहना, और परिस्थिति के हिसाब से खेलना जरूरी है। टेस्ट क्रिकेट में आपको इन चीजों को अपनाना पड़ता है, और ये अनुभव भविष्य में हमारे काम आएंगे। कई युवा खिलाड़ी टीम में आए हैं, उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और आगे और मजबूत बनेंगे। ये सबक हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं, और हम इन्हें आगे ले जाना चाहेंगे। यह एक बेहतरीन सीरीज थी। ऑस्ट्रेलिया को बधाई। हम फिर से एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।"

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