पीथमपुर
धार के कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने ने बताया कि हम विज्ञान शिक्षकों, प्रोफेसरों और अधिकारियों सहित 50 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार कर रहे हैं। उन्हें कचरे की सटीक स्थिति के बारे में सूचित किया जाएगा, ताकि वे लोगों तक सही जानकारी पहुंचा सकें और गलत धारणाओं को दूर कर सकें। बता दें कि विगत दिनों पीथमपुर में कचरे के निष्पादन के खिलाफ जनाक्रोश और दो आत्मदाह की कोशिशों के बाद राज्य सरकार को बैकफुट पर जाना पड़ा है। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
1 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित प्रधान पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के कचरे के निष्पादन पर सुरक्षा दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, अधिकारियों ने लोगों को शिक्षित करने और उनके डर को दूर करने के लिए समय मांगा था। कलेक्टर ने बताया कि मास्टर ट्रेनर्स मंगलवार से अपने काम की शुरुआत करेंगे और 50 और मास्टर ट्रेनर्स को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम वीडियो प्रस्तुतियों और अन्य माध्यमों से मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देंगे।"
पीथमपुर किया गया था शिफ्ट
गौरतलब है कि 2 जनवरी 2025 को 12 सील कंटेनरों में पैक कचरा भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से पीथमपुर स्थित निष्पादन स्थल पर ले जाया गया था। यह जगह राजधानी भोपाल से 250 किलोमीटर दूर है। हालांकि कचरा पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कचरे का निष्पादन मानव और पर्यावरण के लिए हानिकारक होगा।
कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार
3 दिसंबर 2024 को हुई सुनवाई के दौरान मप्र हाईकोर्ट ने अधिकारियों को यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के कचरे का निष्पादन करने में असफल रहने पर फटकार लगाई थी। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर साइट से कचरे को हटाने और स्थानांतरित करने का आदेश दिया था और चेतावनी दी थी कि निर्देश का पालन न करने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
जहरीला है कचरा
बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात मप्र की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड की कीटनाशक फैक्टरी से अत्यंत जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था, जिससे कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर चोटों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हुए थे।

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