नई दिल्ली
त्योहारी सीज़न से ठीक पहले केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में एक अहम फैसला लिया गया है जिससे घर बनाने वालों और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार ने सीमेंट पर लगने वाले 28% जीएसटी को घटाकर अब 18% कर दिया है। यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होगा।
सीमेंट सस्ता, तो मकान सस्ता!
घर बनाने में सीमेंट की लागत सबसे बड़ी होती है और यही वजह है कि उस पर जीएसटी कटौती का सीधा असर जेब पर पड़ता है। आमतौर पर किसी भी घर के निर्माण में कुल लागत का करीब 20% खर्च सिर्फ सीमेंट पर होता है। मान लीजिए आप 40 लाख रुपये में मकान बनवा रहे हैं। इसमें से लगभग 8 लाख रुपये का खर्च सिर्फ सीमेंट पर आएगा। पहले इस 8 लाख रुपये पर 28% यानी 2.24 लाख रुपये GST देना होता था, जिससे सीमेंट की कुल लागत बढ़कर 10.24 लाख रुपये हो जाती थी।अब, जब सीमेंट पर जीएसटी 18% हो गया है, तो इस पर 1.44 लाख रुपये टैक्स लगेगा। यानी कुल सीमेंट की लागत घटकर 9.44 लाख रुपये हो जाएगी। इस तरह 80,000 रुपये की सीधी बचत होगी।
कुल निर्माण लागत में 2-2.5% की गिरावट
सीमेंट सस्ता होने का असर पूरे निर्माण बजट पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी कटौती से घर बनाने की कुल लागत में 2 से 2.5 प्रतिशत तक की कमी संभव है। अगर आप 40 लाख का मकान बना रहे हैं, तो आपको कुल मिलाकर 1 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है।
एक सीमेंट बैग पर होगी कितनी बचत?
पुरानी कीमत: यदि एक सीमेंट बैग की कीमत 350 रुपये है, तो 28% जीएसटी के साथ उसकी कीमत बनती थी 448 रुपये (350 + 98)
नई कीमत: अब 18% जीएसटी के साथ उसी बैग की कीमत होगी 413 रुपये (350 + 63)
कुल बचत प्रति बैग: 35 रुपये
अगर आप मकान निर्माण के लिए हज़ारों बैग सीमेंट इस्तेमाल करते हैं, तो ये बचत लाखों में बदल सकती है।
रियल एस्टेट सेक्टर को भी राहत
इस फैसले का असर केवल घर बनाने वालों पर ही नहीं, बल्कि पूरे रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर भी पड़ेगा। कम लागत में मकान बनेंगे, जिससे:
फ्लैट और मकान की कीमतें घट सकती हैं
डवलपर्स की लागत कम होगी
अधिक लोग घर खरीदने की सोचेंगे
निर्माण कार्यों में तेजी आएगी
अगर रियल एस्टेट कंपनियां यह लाभ खरीदारों तक पहुंचाती हैं, तो मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
सीमेंट कंपनियों को मिलेगा डिमांड बूस्ट
सीमेंट सस्ता होने से उसकी डिमांड बढ़ने की संभावना भी तेज हो गई है। त्योहारी सीज़न और मानसून के बाद की निर्माण गतिविधियों में उछाल आने की उम्मीद है। कंपनियां प्रति बैग कीमत 10 से 30 रुपये तक घटा सकती हैं, जिससे बाज़ार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

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