रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई। लाठी-डंडों से लैस करीब 80-90 लोगों की भीड़ मॉल में घुस आई और क्रिसमस की सजावट को तहस-नहस कर दिया। यह घटना उस दिन हुई जब राज्य में धार्मिक रूपांतरण के आरोपों के खिलाफ बंद का आह्वान किया गया था।
भीड़ ने नहीं मानी सुरक्षा गार्ड्स की रोक
खबर के मुताबिक, भीड़ ने क्रिसमस ट्री, लाइट्स और अन्य सजावट को तोड़ दिया। सुरक्षा गार्ड्स ने रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। मॉल के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'हम पिछले 16 साल से हर बंद का समर्थन करते आए हैं, लेकिन ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। भीड़ ने हमें धमकाया और हिंसा की।' एक अन्य कर्मचारी ने बताया, 'कई महिलाएं रोने लगीं। जो भी रोकने की कोशिश करता, भीड़ उस पर टूट पड़ती। लोग बार-बार चिल्ला रहे थे कि वे सांता नहीं देखना चाहते। फिल्म देखने आए दर्शक डरकर भागने लगे।'
बंद की वजह
सरवा हिंदू समाज ने कथित धार्मिक रूपांतरण के खिलाफ राज्यव्यापी बंद बुलाया था। इसका मुख्य कारण कांकेर जिले के बड़ेतेवड़ा गांव में हुआ विवाद था। 16 दिसंबर को गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता का शव ईसाई रीति से अपनी निजी जमीन पर दफनाया। इससे नाराज भीड़ ने प्रेयर हॉल में तोड़फोड़ की और सामान जला दिया। 18 दिसंबर को दो समुदायों में झड़प हुई। पत्थरबाजी में 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हो गए। बाद में कानूनी प्रक्रिया से शव निकालकर कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस घटना ने पूरे राज्य में तनाव बढ़ा दिया।
राज्य में बंद का मिला-जुला असर
बंद को शहरों में अच्छा समर्थन मिला। रायपुर सहित कई शहरी इलाकों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर कम रहा। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन ज्यादातर इलाकों में शांति बनी रही।

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