मुंबई
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज बताया कि चालू वित्त वर्ष की शुरूआत से 05 जून तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश्कों (एफपीआई) ने घरेलू बाजार में पांच अरब डॉलर की बिकवाली की है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए बताया कि बाहरी वित्तपोषण के मामले में वित्त वर्ष 2023-24 में एफपीआई के निवेश प्रवाह में उछाल आया और शुद्ध एफपीआई निवेश 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 की शुरूआत से लेकर 05 जून तक एफपीआई ने पांच अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की है।
श्री दास ने बताया कि वर्ष 2023 में भारत ने एशिया प्रशांत में ग्रीनफील्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी। वित्त वर्ष 2023-24 में सकल एफडीआई मजबूत रहा लेकिन शुद्ध एफडीआई में कमी आई। बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और गैर-निवासी जमाओं में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक शुद्ध अंतर्वाह दर्ज किया गया। ईसीबी समझौतों की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि व्यापार घाटे में कमी, सेवा निर्यात में मजबूत वृद्धि और मजबूत प्रेषण के साथ वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में चालू खाता घाटा में कमी आने की उम्मीद है। भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के अभूतपूर्व उदय ने भारत के सॉफ्टवेयर और व्यावसायिक सेवाओं के निर्यात को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है। भारत – 2024 में विश्व प्रेषण में अपेक्षित 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वैश्विक स्तर पर रेमिटेंस का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है। कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए चालू खाता घाटा अपने संधारणीय स्तर के भीतर रहने की उम्मीद है।
श्री दास ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक नया मील का पत्थर छूते हुए 31 मई 2024 तक 651.5 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। भारत का बाहरी क्षेत्र लचीला बना हुआ है और प्रमुख बाहरी संकेतक लगातार बेहतर हो रहे हैं। कुल मिलाकर, हम अपनी बाहरी वित्तपोषण आवश्यकताओं को आराम से पूरा करने के प्रति आश्वस्त हैं।

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