पन्ना
ऐसा कहीं और नहीं सुना होगा कि जमीन में पड़ा बेशकमती रत्न अचानक मिल जाए और देखते ही देखते सामने वाला लखपति बन जाए। लेकिन पन्ना की वसुंधरा रतनगर्भा धरती में यह करिश्मा होता अक्सर देखा गया है। ऐसा ही मामला उस समय प्रकाश में आया जब एक व्यक्ति चमचमाता हुआ बेशकीमती रत्न हीरा पन्ना के डायमंड ऑफिस में जमा करने पहुंचा। जब उसने या हीरा वहां के हीरा पारखी को दिखाया तो उसने बताया कि यह उज्जवल, जैम क्वालिटी का हीरा जो प्रति केरेट अच्छे दामों में बिकता है। जिसके बाद युवक का खुशी का ठिकाना ना रहा और समझ गया किया हीरा लाखों का है। पन्ना जिले के निवासी इंद्रजीत सरकार सुबह जब घूमने निकले तो उन्हें हीरा खदान के पुराने मिट्टी के ढेर के पास कुछ चमकता हुआ दिखा तो उन्होंने तुरंत उस पत्थर को उठाया तो वह समझ गए कि है हीरा है। जिसको लेकर वह डायमंड ऑफिस जमा करने के लिए पहुंचे तो वह हीरा 4.38 कैरेट वजन का निकला जिसकी अनुमानित कीमत 20 लाख रुपए के लगभग आंकी जा रही है।
जब खदान लगाई थी तब नहीं मिला था हीरा, अब उसी के मलबे से खुली किस्मत
इंद्रजीत सरकार पिता रविंद्र नाथ सरकार निवासी ग्राम जरुआपुर सुबह अपनी पुरानी खुदी हुई हीरा खदान के पास से निकल रहा था और सोच रहा था कि इस खदान से कुछ नहीं मिला। मैं सोच ही रहा था कि 1 साल की कड़ी मेहनत के बाद भी कुछ प्रतिफल नहीं मिला तभी अचानक उसकी नजर चमचमाते हुए पत्थर पर पड़ गई और उसने उसे उठाकर घर ले आया। घर वालों को जब उसने पत्थर दिखाया तो सभी ने यही बताया कि यह पत्थर हीरा है। तत्पश्चात वह 11 जनवरी 2023 को हीरा कार्यालय पन्ना पहुंचा तो वहां हीरा पारखी अनुपम सिंह ने हीरे की जांच कर उसे जमा कर लिया। उन्होंने बताया कि यह उज्जवल जेम क्वालिटी का हीरा है। जिसे आगामी होने वाली हीरे की नीलामी में रखा जाएगा। हीरा विक्रय उपरांत संबंधित को टैक्स की राशि काटकर शेष रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।
आधुनिक खेती के लिए करूंगा इस पैसे का उपयोग
इंद्रजीत सरकार जोकि वास्तव में किसान है और इनकी आर्थिक हालत मध्यम है। इन्होंने पूर्व में खदान का पट्टा लेकर लगभग 1 साल कड़ी मेहनत से खुदाई व मिट्टी की धुलाई की लेकिन उस समय इनके हाथ कुछ भी नहीं लगा। जिससे वह हताश और निराश थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। खदान का कार्य बंद होने के बाद उसे खदान की ही धूली हुई हीरे की चाल से बेशकीमती हीरा मिल गया। इंद्रजीत का कहना है कि इस हीरे की नीलामी के बाद जो पैसा मिलेगा वह हम अपनी खेती में लगाएंगे और नई तकनीकी के साथ आधुनिक खेती करेंगे।

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