भोपाल
प्रदेश की पुलिस को अब मृतकों के अधिकार की रक्षा का भी ध्यान हर हाल में रखना होगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने एडवाइजरी जारी की है। हादसों या अन्य घटनाओं में मृत हुए लोगों के शव को सम्मान के साथ संभालना और उसकी पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। इस संबंध में राष्टÑीय मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन को लिखा था। इसके बाद यह एडवाइजरी जारी की गई है। इस संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ ही भोपाल और इंदौर के पुलिस उपायुक्तों को निर्देशित किया गया है। इन सभी अफसरों को अपने क्षेत्र और जिलों के डीएसपी, एसडीओपी, सीएसपी, टीआई सहित सभी विवेचना अधिकारियों से पालन करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
इन मामलों में रखना होगा ध्यान
यह भी निर्देश दिए गए हैं कि अग्नि दुर्घटनाओं,आत्महत्या, हत्या, यौन अपराधों के कारण मृत्यु, हिरासत में मौत या आत्महत्या, सड़क या अन्य दुर्घटनाओं में जहां मौत होती है। ऐसे स्थिति में मृतक के शरीर को ढंकना होगा। स्म्मान के साथ शरीर को संभालना होगा। इसके बाद शव परीक्षण प्रक्रियाओं को करने के लिए तुरंत मोर्चुरी में भेजना होगा। वहीं शवों की पहचान के लिए विशिष्ट बॉडी कोड की लेबलिंग, तकनीकी फोटोग्राफ, शवों से अन्य डेटा एकत्र किया जा सकता है। यदि शव अज्ञात है तो उसकी शिनाख्त के लिए गंभीर प्रयास करने के साथ ही गरिमापूर्ण ढंग से निस्तारण करना होगा।
पोस्टमार्टम के लिए देरी नहीं होगी बर्दाश्त
जारी एडवाइजरी में सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि पोस्टमार्टम में देरी नहीं होना चाहिए। यह पुलिस को ही सुनिश्चित करना होगा कि फॉरेंसिक टीम को अपराध स्थल पर बुलाने और मृतक के शरीर के पोस्टमार्टम के लिए स्थानांतरित करने में अनावश्यक देरी न हो। मोर्चुरी में भी 72 घंटे से ज्यादा शव को न रखा जाए।

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