August 15, 2026

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लखनऊ में नौसेना शौर्य संग्रहालय तैयार, दो सप्ताह तक मुफ्त मिलेगा प्रवेश

लखनऊ
स्वतंत्रता दिवस से अब राजधानी सहित प्रदेशभर के लोग नौसेना के कर्तव्य व पराक्रम पर गर्व कर सकेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 मई को इसका लोकार्पण किया था।

अब ढाई माह बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण विशेष संग्रहालय का संचालन करेगा। आजादी के उत्सव पर दो सप्ताह तक लोग इसे मुफ्त देख सकेंगे, यानि पर्यटन करने वालों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके बाद बड़ों का 50 व बच्चों का 25 रुपये का टिकट लेना होगा।

शहीद पथ से इकाना स्टेडियम के लिए उतरने पर स्टेडियम से 500 मीटर आगे बढ़ने पर गोमती नदी किनारे सीजी सिटी मिलती है। नौसेना शौर्य संग्रहालय के मुख्य गेट से प्रवेश करते ही बाएं हाथ पर भारतीय नौसेना के विशेष पोत आइएनएस गोमती का पूरा ब्योरा पढ़कर जान सकते हैं। इसी के बगल में पोत के लिए उपयोगी रहे कैपस्टन ड्रम का दीदार होता है। गोमती पोत लखनऊ की पहचान बनेगा और पर्यटन केंद्र के रूप में आकर्षित करेगा।

मिसाइल जेट विमान की तरह आती है नजर
तिरंगे के रंग में रंगी सीईटी 53 एम पनडुब्बी अवरोधक बरबस आकर्षित करती है। पास में ही आसमान में निशाना साधती एके-726 मीडियम रेंज तोप सजी है। जिफ 101 लांचर को देखकर ऐसा लगेगा कि रोबोट दो हाथों में मिसाइलें लेकर खड़ा है। आइएनएस गोमती के मुख्य मस्तूल और अग्र मस्तूल को देखकर सीना चौड़ा हो जाता है। पी-21 पोत अवरोधक मिसाइल जेट विमान की तरह नजर आती है।

वहीं, अवरोधक मिसाइल कंटेनर, ट्रिपल टारपीडो लांचर व एके 230 तोप प्रणाली सेना की गाथा सुनाती नजर आती है। इसी परिसर में ओपन एयर म्यूजियम में टीयू-142 विमान लकदक तैयार है, जो अपनी खूबियों और सेना के अप्रतिम शौर्य से देशप्रेमियों को अवगत कराएगा।

आजादी के उत्सव पर दो सप्ताह तक लोग इसे मुफ्त देख सकेंगे। इसके बाद बड़ों का 50 व बच्चों का 25 रुपये का टिकट लेना होगा। परिसर में लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने व रेस्तरां आदि खोलने के लिए जल्द टेंडर जारी होगा। -प्रथमेश कुमार, एलडीए उपाध्यक्ष

क्या है आइएनएस गोमती
नौसेना शौर्य संग्रहालय का निर्माण भारतीय नौसेना और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयास से हुआ है। इसमें समुद्र की रक्षा करने वाली नौसेना की वीरता, शक्ति, पराक्रम और तकनीकी दक्षता दिखेगी। भारतीय नौसेना पोत आइएनएस गोमती 28 मई 2022 को राष्ट्र की 34 वर्षों के गौरवशाली सेवा के बाद रिटायर हो गया था। पार्क में घूमते हुए दर्शकों को वास्तविक नौ सैनिक यंत्र दिखाई देंगे, जिसमें से कई भारतीय नौसेना पोत गोमती से संबंधित हैं।

2024 से हो रहा था निर्माण
इस परियोजना की वित्तीय वर्ष 2024-25 में 23.66 करोड़ रुपये स्वीकृति हुई थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना में ओपन एयर म्यूजियम में टीयू-142 विमान की स्थापना व क्यूरेशन कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी।

एके 230 तोप प्रणाली
एके 230 एक तीव्र गति से फायर करने वाली दोहरी तोप प्रणाली है, इसे विमानों व मिसाइलों से होने वाले खतरों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया। रडार से निर्देशित इसकी दो तोपें तेज गति से एक साथ फायर करती हैं। पलक झपकते छह किलोमीटर दूर तक के लक्ष्य को मार गिराती हैं।

सीईटी 53 एम पनडुब्बी अवरोधक टारपीडो
सीईटी 53 एम पानी के भीतर वार करने वाला शक्तिशाली हथियार था, इसे सोवियत संघ में समुद्र में नीचे चुपचाप चलने वाली पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया था। यह अपने लक्ष्य को सुनता है यानि ध्वनि से निर्देशित है। सटीकता से आगे बढ़ता है और 200 किलोग्राम शक्तिशाली विस्फोटक से हमला करता। यह 15 किलोमीटर से अधिक दूरी तक पनडुब्बी का पीछा करने व 200 मीटर की गहराई तक सटीक निशाना लगा सकता था।

एके 726 मीडियम रेंज तोप
एके 726 दो बैरल वाली नौ सैनिक तोप है, इसका उपयोग युद्धपोत, दुश्मन के जहाज, विमानों व मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए किया जाता रहा है। यह 15.5 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित जहाजों, नावों और आकाश में 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को निशाना बना सकता था। यह तोप प्रति मिनट 80 से 90 गोले दागने में सक्षम रही है।

जिफ 101 लांच व आरजेड 61 सतह से वायु मिसाइल
जिफ 101 लांचर का उपयोग आरजेड 61 सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलों को लांच करने के लिए किया जाता है। यह मिसाइल 4000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है और 25 किलोमीटर से अधिक दूरी पर 1500 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से उड़ने वाले लक्ष्यों को नष्ट कर देती है।

कैपस्टन ड्रम
कैपस्टन का उपयोग भारी लंगर की जंजीरों और मोटी रस्सियों को खींचने के लिए किया जाता रहा। यह शक्तिशाली मोटर से संचालित होती थी और कैपस्टन केवल रस्सियों व लंगर की जंजीरों के बल पर 4000 टन से अधिक वजन वाले पूरे जहाज को हिलाने के लिए पर्याप्त रहा।

मुख्य मस्तूप
यह भारतीय नौ सेना पोत गोमती पर लगाया गया दूसरा मस्तूल था। इस पर भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित आरएडब्ल्यूएल रडार लगाया गया था। यह रडार निरंतर घूमता रहता था और 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर दुश्मन के विमानों व मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम था।

अग्र मस्तूल
यह भारतीय नौ सेना पोत गोमती पर लगाया गया था और इस पर लगे नेविगेशन रडार का उपयोग व्यस्त बंदरगाहों के साथ-साथ खुले जल क्षेत्रों में जहाज को दिशा देने के लिए किया जाता था। इसके ऊपर एक गुंबद है, जिसमें इलेक्ट्रानिक्स युद्ध उपकरण लगे थे। इनका उपयोग दुश्मन के रडार प्रसारणों को जांचकर और दुश्मन के जहाजों, विमानों और मिसाइलों का पता लगाने के साथ निशाना बनाने के लिए किया जाता था।

पी-21 पोत अवरोधक मिसाइल
रूस में विकसित यह सतह से सतह पर मार करने वाली पोत अवरोधक मिसाइल दुश्मन के जहाजों पर अचूक निशाना साधने के लिए डिजाइन की गई थी। दागे जाने पर यह मिसाइल लक्ष्य के करीब पहुंचते ही अपने रडार होमिंग हेड को सक्रिय करके लक्ष्य पर लाक हो जाती थी, इससे जबरदस्त विस्फोट होता था। इसी मिसाइल के एक पुराने माडल का उपयोग 1971 के युद्ध के दौरान कराची बंदरगाह पर किए गए साहसिक नौ सैनिक हमलों में किया गया था। इस मिसाइल का वजन 2300 किलोग्राम है, इसमें 500 किलोग्राम का विस्फोटक वारहेड लगा होता है। यह लगभग 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है।

ए 244 एस ट्रिपल टारपीडो लांचर
इस टारपीडो लांचर का उपयोग दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ इतावली मूल के ए 244 एस और भारतीय टाल टारपीडो दागने के लिए किया जाता था। एक बार दागे जाने के बाद टारपीडो 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ते दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाकर नष्ट करने के लिए 450 मीटर तक की गहराई में गोता लगाते थे। इन टारपीडो में उन्नत सोनार प्रणाली लगी होती थी, जो पनडुब्बी के इन टारपीडो से बचने की कोशिश करने पर लगातार पीछा करने में मदद करती थी।