रायगढ़
राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में बंगाल व केरल के कलाकातरों ने अद्भूत प्रस्तुति दी। बंगाल के कलाकारों ने मूल रूपअनुवाद से कृतिवास के रामायण पर आधारित है। यह वाल्मीकि का ही नहीं है अपितु उनकी कल्पनाशीलता भी इसमें है। कृतिवास ने श्रीराम के कोमल पक्षों को उभारा है, वे बहुत भावुक हैं और चूंकि अरण्य कांड में सीता हरण जैसे कारुणिक प्रसंग हैं अतएव यह भावुकता इस कथा में स्पष्ट रूप से उभरती है। सुमधुर बांग्ला भाषा में यह कथा हो रही है और बात दंडकारण्य की हो रही है। यह भारत की अद्भुत सांस्कृतिक एकता है। बंगाल से कृतिवास से लेकर तमिल के कम्बन तक सबके सृजन की भूमि एक ही है।
राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के तीसरे दिन आज केरल से आए कलाकार दल ने पारंपरिक लोक वेशभूषा में प्रस्तुति दी। इस अवसर पर उन्होंने रामकथा से जुड़े प्रसंगों की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। केरल की रामायण मंडली ने संगीतमय प्रस्तुति देते हुए सूर्पणखा प्रसंग से लेकर रावण वध तक के प्रसंग की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा के साथ इस प्रस्तुति में केरल में भगवान राम की महिमा की सुंदर अभिव्यक्ति दी गई, कलाकारों ने भक्ति और भाव के मिश्रण का जीवंत प्रदर्शन किया।
दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्र बचेली से आए रामायण मंडली के कलाकारों ने महिलाएं नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति दी जो अद्भुत जान पड़ता है। इस टीम में महिला सशक्तिकरण की भी साफ झलक दिखाई पड़ती है।

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