भोपाल
राजधानी में स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग और लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने 8 जुलाई से 17 जुलाई के बीच 10 दिनों का विशेष अभियान चलाया, जिसमें 40 स्कूल बसें सुप्रीम कोर्ट के तय सुरक्षा मानकों को तोड़ती पाई गईं।
जांच अभियान के दौरान ट्रैफिक पुलिस की टीमों ने शहर के अलग-अलग चौराहों और स्कूलों के बाहर 600 से अधिक स्कूल बसों को रोककर चेक किया। जिन बसों में कमियां पाई गईं, उनके मौके पर चालान काटे गए और गंभीर लापरवाही वाले मामलों को आरटीओ को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।
एमपी नगर और अरेरा कॉलोनी क्षेत्र में ज्यादा कमियां
भोपाल के एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और लालघाटी जैसे प्रमुख स्कूल बेल्ट में चली इस चेकिंग के दौरान ज्यादातर बसों में स्पीड गवर्नर बंद मिले और इमरजेंसी गेट पर सामान रखा पाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुनाफा कमाने के चक्कर में बच्चों की जान से जोखिम उठाया जा रहा है।
अब प्राइवेट स्कूल वैनों की बारी
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक यह 10 दिवसीय अभियान केवल स्कूल बसों पर केंद्रित था। अब जल्द ही शहर में चलने वाली ओमिनी, ऑटो और प्राइवेट वैनों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें वैनों की ओवरलोडिंग, व्हीकल फिटनेस, परमिट, स्पीड गवर्नर और इमरजेंसी एग्जिट की कड़ाई से जांच होगी।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु
चेकिंग का समय: 8 जुलाई से 17 जुलाई (10 दिन का विशेष अभियान)।
बसों की जांच: 600 से अधिक स्कूल बसों का इंस्पेक्शन किया गया।
कार्रवाई: 40 बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन मिला, चालान कटे।
अगला टारगेट: प्राइवेट वैन और ऑटो, जहां सबसे ज्यादा ओवरलोडिंग की शिकायतें हैं।
नोट: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्कूल प्रबंधन अपने ठेकेदारों की बसों की जांच खुद भी करें, वरना आरटीओ द्वारा परमिट रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।

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