देसी घी में केमिकल का उत्पाद भी मिलता है। इससे घी के पोषण में कमी आती है। साथ ही नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। देसी उत्पादों में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें शरीर के लिए घातक भी साबित हो सकती हैं। इसलिए इसे पहचानना जरूरी है।
देसी घी में कौन सा केमिकल होता है: फार्म हाउस एंड स्टैंडर्ड ऑफ इंडिया (FSSAI) के अनुसार देसी घी में कोल तार डाई का उत्पाद होता है। अगर आप इसे पहचानना चाहते हैं तो इस टेस्ट की मदद ले सकते हैं। यह कुछ ही शब्द है, जिसमें घी का असली रंग दिखाया गया है।
नकली घी या कांच की कटोरी या बोतल लें।
इसमें 2ml आकर्षक देसी घी मिलाया गया है।
इसके अंदर 5ml कंसंट्रा में वर्णित एचसीएल नासा स्टॉक है।
मिक्सचर को अच्छी तरह हिलाएं और फिर धीरे-धीरे रखें।
शुद्ध घी में कोई बदलाव नहीं।
मगर कोल तार डाई के उत्पाद वाले घी का रंग लाल हो जाएगा।
कोल तार डाई के उत्पाद का कारण कोल तार डाई एक कलात्मक रंग एजेंट है। यह टोल्यूनि, जाइलीन और बेंजीन जैसे कई सारे डाइड्रोकार्बन को मिलाकर बनता है। यह कोल गैस या कोयला के बीच ज़ियावावाला एक बाय प्रोडक्ट है। जब यह सिलिकॉन कार्बन एचसीएल के साथ रिएक्ट करते हैं तो लाल रंग देते हैं।
कोल तार डाई के नुकसान देसी घी के अलावा कई साडी तत्वों के अंदर भी इस एजेंट का प्रयोग किया जाता है। टॉफी, कैंडी आदि प्रमुख हैं। प्रशिक्षुओं का कहना है कि यह आपके दिमाग को काफी नुकसान पहुंचाता है। इससे याददाश्त और सीखने की क्षमता कम होती है। एलर्जी, पेट की समस्याएं भी हो सकती हैं।

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