हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दादा-दादी, माता-पिता आदि जो इस दुनिया से जा चुके हैं, वह पितर या पूर्वज कहलाते हैं। कहते हैं जिस तरह देवी-देवताओं की पूजा अनिवार्य मानी जाती है, उसी तरह पूर्वजों की तृप्ति करना भी बेहद जरूरी माना जाता है नहीं तो घर में पितृ दोष पैदा होता है। जिससे घर में कलह, पैसों की तंगी आदि रहना शुरू हो जाती है। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म से उन्हें प्रसन्न करते हैं तो वहीं कुछ लोग अपने पूर्वजों की तस्वीर घर में लगाकर नियमित रूप से पूजा अर्चना भी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर को घर में रखने से उनका आशीर्वाद परिवार पर हमेशा बना रहता है लेकिन कई बार लोग जाने-अनजाने में पितरों की तस्वीर के साथ कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते है जिसके कारण उन्हें पितृदोष के अशुभ परिणामों का सामना करना पड़ता है। तो आइए जानते हैं पितरों की तस्वीर घर में लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
अक्सर देखा जाता है लोग अपने पूर्वजों की तस्वीर घर के मंदिर में लगाकर देवी देवताओं के साथ पूजा करते हैं। शास्त्रों में घर के मंदिर में पितरों की तस्वीर लगाना वर्जित बताया है। पितरों की तस्वीरों को देवी-देवताओं के साथ रखने से देवतागण नाराज होते हैं और देव दोष भी लगता है। शास्त्रों में पितर और देवताओं के स्थान अलग-अलग बताए गए हैं क्योंकि पितर देवताओं के समान ही समर्थवान और आदरणीय हैं। एक जगह दोनों को रखने से किसी के आशीर्वाद का शुभ फल नहीं प्राप्त होता है।
वास्तु के अनुसार, पितरों की तस्वीर को भूलकर भी घर के ब्रह्म अर्थात मध्य स्थान पर, बेडरूम या फिर किचन में नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से पूर्वजों का अपमान होता है और घर में पारिवारिक कलह बढ़ जाती है, साथ ही सुख-समृद्धि में कमी आती है।
इसके अलावा, पितरों की तस्वीर को ऐसी जगह पर भी नहीं लगाना चाहिए जहां आते-जाते उस फोटो पर नजर पड़े। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में पितरों की अधिक तस्वीरें न हों।
दक्षिण दिशा को यमराज के साथ-साथ पितरों की भी दिशा माना गया है। ऐसे में आप घर की दक्षिण दिशा में अपने पितरों की तस्वीर लगा सकते हैं। ऐसा करने से आपके ऊपर पितरों का आशीर्वाद बना रहेगा।
आगे आपको बता दें अगर आप पितृदोष को सामना कर रहे हैं तो उससे मुक्ति के लिए पितृपक्ष के दौरान जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें क्षमता के अनुसार दक्षिणा दें। इसके साथ ही पीपल के पेड़ को दोपहर में जल का अर्घ्य दें और जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा में अर्घ्य दें।

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