नई दिल्ली
बीते जून महीने में एक बार फिर ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन जून में 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। एक साल पहले इसी महीने में यह 1,73,813 करोड़ रुपये था। हालांकि, मई 2025 में कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के पार था। इस लिहाज से कलेक्शन में गिरावट आई है।
क्या कहते हैं आंकड़े
मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक घरेलू लेनदेन से ग्रॉस रेवेन्यू जून में 4.6 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात से जीएसटी राजस्व 11.4 प्रतिशत बढ़कर 45,690 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस सेंट्रल जीएसटी यानी सीजीएसटी जून में 34,558 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी राजस्व 43,268 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी राजस्व करीब 93,280 लाख करोड़ रुपये रहा। इसी तरह, उपकर से राजस्व 13,491 करोड़ रुपये रहा। इस बीच, जून में कुल रिफंड 28.4 प्रतिशत बढ़कर 25,491 करोड़ रुपये हो गया।
अप्रैल में बना था रिकॉर्ड
जीएसटी कलेक्शन पिछले महीने यानी मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा। इस वर्ष अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। कहने का मतलब है कि लगातार दो महीने तक कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा था।
जीएसटी के 8 साल
यह भी दिलचस्प है कि आज यानी एक जुलाई 2025 को जीएसटी लागू हुए आठ साल पूरे हो गए हैं। वित्त मंत्रालय ने एक रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए कहा है कि जीएसटी लागू होने के पहले वर्ष (नौ महीने) में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 7.40 लाख करोड़ रुपये था। पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस कलेक्शन रिकॉर्ड 22.08 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 9.4 प्रतिशत की वृद्धि है। सालाना जीएसटी राजस्व लगभग तीन गुना हो गया है। यह वित्त वर्ष 2017-18 के सात लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 22 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

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