गोरखपुर
गोरखपुर की रामगढ़ताला झील में 2 साल पहले 'लेक क्वीन क्रूज' शुरू किया गया था। लेकिन अब इसे बंद किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि संचालक गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को किराया नहीं दे रहे हैं। यह किराया धीरे-धीरे बढ़कर 89 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
जीडीए की तरफ से नोटिस भेजे जाने के बाद इसके संचालकों ने निर्णय लिया है कि घाटे का सौदा होने की वजह से जल्द ही इसे बंद किया जा सकता है। वहीं नौका विहार आने वाले पर्यटकों की शिकायत है कि इसका किराया बहुत ज्यादा है।
रामगढ़ताल में नौका विहार के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए यह बुरी खबर की तरह है। 2 साल पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों उद्घाटन किए जाने के बाद लेक क्वीन क्रूज को बड़े जोर-शोर से रामगढ़ ताल झील में उतारा गया था। शुरुआत में इसको लेकर दर्शकों और पर्यटकों में बेहद उत्साह का माहौल था।
लेकिन अब इसे बंद किया जा सकता है, क्योंकि इसका संचालन करने वाली फर्म ने जीडीए का अब तक 89 लाख रुपए किराया नहीं जमा कराया। इस संदर्भ में जीडीए द्वारा तीन बार नोटिस भेजा जा चुका है। इसके बाद संचालकों ने क्रूज को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है।
क्रूज का संचालन करने वाली फर्म ने 7,41000 रुपए प्रति माह की बोली लगाकर इसके संचालन का ठेका अपने नाम किया था। हालांकि जब इसकी बोली लगाई गई थी उस समय इसका बेस प्राइस 3 लाख रुपए रखा गया था। इस बारे में संचालकों का कहना है कि पर्यटक आते हैं, लेकिन जिस हिसाब से इसके रखरखाव, स्टाफ के खर्चे और किराया है, उसे निकालना मुश्किल हो रहा है। घाटे का सौदा साबित होने के कारण इसे बंद करने के बारे में विचार चल रहा है। वहीं इस बारे में पर्यटकों का कहना है कि क्रूज का किराया और यहां लंच या डिनर करना महंगा है किसी भी आम परिवार के लिए इतना पैसा अफोर्ड करना मुश्किल है।
इस बारे में क्रूज के मालिक राजकुमार राय ने बताया कि प्रदेश के लिए इतिहास रचने वाले क्रूज को लेकर शुरुआत में तो पर्यटकों में उत्साह रहा। लेकिन अब धीरे-धीरे इसका किराया निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। जिस फर्म ने इसे चलवाने वाले का ठेका लिया था, उन्होंने जीडीए का किराया भी अभी तक नहीं दिया,जो बढ़कर 89 लाख रुपए पहुंच चुका है। नोटिस के अलावा, फिलहाल इस बारे में जीडीए की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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