नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट टेंशन के बावजूद मॉर्गन स्टैनली ने भारत की FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा अप्रैल में दिए गए 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से ऊपर है. जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट ने जानकारी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. लेकिन मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि FY27 में भारत 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. FY28 में यह ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
तेल की कीमतें जून 2026 तिमाही में सबसे हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कम होने की उम्मीद है. शुरुआती तिमाही में विकास थोड़ा धीमा पड़ सकता है, लेकिन बाद में सुधार होगा. घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सहायता से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी भी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विकास पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।
ब्याज दरों बदलाव होने की संभावना कम
मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा. RBI नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य फैसले भी ले सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर कंट्रोल रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI सतर्क रहेगा. मिडिल ईस्ट संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल आने का खतरा है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है. फिर भी, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू फैक्टर्स से भारत इस चुनौती का सामना कर सकता है।
भारत को मिलेंगी नई संभावनाएं
इस संकट के बावजूद भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है. मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, निवेश बढ़कर जीडीपी का 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे अगले पांच साल में अतिरिक्त 800 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आ सकता है।
यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को नई संभावनाएं देगा. मध्यम अवधि में 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना संभव है. सरकार की सुधार नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और घरेलू खपत इस विकास को और मजबूत बनाएंगी।
आरबीआई ने दी चेतावनी
हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा किसी भी संभावित आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक विकास को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।
आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

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