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NDA बैठक में पहुंचीं सायोनी घोष, शुभेंदु अधिकारी से होगी मुलाकात; 4 महीने में क्यों बदले सियासी तेवर?

 नई दिल्ली

कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं लोकसभा सांसद सायोनी घोष मंगलवार को NDA की मीटिंग में पहुंचीं हैं। हालांकि, वह अकेली नहीं हैं। इनमें वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। खबर है कि इससे पहले ही सुदीप बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुलाकात कर चुके हैं। कह जा रहा है कि वह बागी सांसदों से भी आज मिल सकते हैं।

मंगलवार सुबह संसद में एनडीए के सांसदों की अहम मंगल मिलन बैठक शुरू हो गई है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेता शामिल हुए हैं। यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब 12 बजे लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 चर्चा होने जा रही है। कहा जा रहा है कि इस विषय पर चर्चा के लिए कम से कम छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

मोदी सरकार संसद में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' लेकर आई है, जिस पर सायोनी घोष ने स्वागत किया है. पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. अब सरकार ने संसद में बिल पर चर्चा के लिए सायोनी घोष के नाम को भी शामिल किया है. 

संसद के सायोनी घोष के भाषणों ने उन्हें एक अलग पहचान दी.उनके भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं.वो बांग्ला, हिंदी और अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह बोलती हैं. 2024 से अभी तक मोदी सरकार पर हमलावर रहती थी, लेकिन अब सरकार के पक्ष में अपनी बात रखेंगे. ऐसे में सभी की निगाहें है कि संसद में वो किस तरह से विपक्ष पर निशाना साधती हैं? 

सायोनी घोष ने बदला सियासी गियर
सियासत में सायोनी घोष को आए हुए पांच साल हुए हैं. 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ी, लेकिन जीत नहीं सकी. इसके बाद 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर सीट से सांसद चुनी गईं. 30 साल की सायोनी घोष ने बहुत कम समय में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. संसद से सड़क मुखर रहती हैं. सोयीनी अक्सर अपने भाषणों में गीतों और शायरी का भी ख़ूब इस्तेमाल करती हैं. इस तरह से उनके भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। 

2024 में सांसद बनने के बाद से लेकर अप्रैल 2026 तक सायोनी घोष को पीएम मोदी और बीजेपी के मुखर विरोधी चेहरे के तौर पर जाना जाता रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद सियासी पाला बदल लिया. टीएमसी से बगावत कर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सायोनी घोष एनसीपीआई में शामिल हो गईं और मोदी सरकार के समर्थन में उतर गई. इस तरह से उन्होंने अपना सियासी गियर बदल दिया है, अभी तक उनके निशाने पर मोदी सरकार रहा करती थी, लेकिन अब विपक्ष उनके टारगेट पर आ गया है।  

विपक्ष को सायोनी घोष ने सुनाई खरी खरी
लोकसभा सांसद सायोनी घोष ने पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से भागने के लिए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा दिए जाने के बाद अब हम चर्चा करेंगे. इस्तीफा उन्होंने दे दिया, उसके बाद भी विपक्ष चर्चा करने से भाग रहा. सदन का हर दिन, हर मिनट बहुत कीमती होता है. मुझे लगता है कि देश के युवा और छात्र-छात्राओं को भी जानना चाहिए कि इस नए बिल में क्या आ रहा है, क्या-क्या रिफॉर्म्स हम लोग एड्रेस करना चाहते हैं। 

सायोनी घोष ने कहा कि विपक्ष आलोचना करे, डिस्कस करे, कंस्ट्रक्टिव डिबेट हो. उनके भी अगर कोई सुझाव हों तो वह दें. संसद और सदन और सरकार उसका अमल करे, हेल्दी डेमोक्रेसी की वही छवि होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष चर्चा करने से भाग रहा है. वो सिर्फ राजनीति कर रहा है. इस तरह सायोनी घोष ने विपक्ष पर जमकर हमले किए। 

संसद में सरकार की ढाल बनेगी सायोनी घोष
नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए और कड़े कानून के लिए एक विधेयक पेश किया है. सरकार और स्पीकर ने चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण ऐसा हो नहीं सका. मंगलवार को संसद में चर्चा होनी है, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। 

मोदी सरकार ने चर्चा के लिए सत्तापक्ष की तरफ से जिन सांसदों के नाम दिए हैं, उसमें सायोनी घोष का भी नाम शामिल हैं.सायोनी घोष सांसद बनने के बाद पहली बार मोदी सरकार के लिए सदन में सियासी ढाल बनेंगी और मजबूती से बात रखेंगी. मोदी सरकार की तरफ से वो विपक्ष पर निशाना साधेंगी. ऐसे में देखना होगा कि सायोनी घोष किस तरह से विपक्ष के खिलाफ आक्रामक तेवर अख्तियार करती हैं? 

सायोनी घोष के निशाने पर जब रही मोदी सरकार
सायोनी घोष ने संसद में अपना आखिरी भाषण अप्रैल में दिया था.संसद में दिए गए उनके एक चर्चित भाषण में उन्होंने भारतीय संविधान को अपने लिए भगवद् गीता बताया था.इस भाषण में घोष ने कहा था कि जिस तरह से ये संसद प्रधानमंत्री के लिए एक मंदिर है,इसी तरह ये हमारे लिए भी एक मंदिर है और भारत का गणतंत्र हमारे लिए पूजा है. संविधान हमारी भगवद् गीता है। 

संसद के बजट सत्र के दौरान सायोनी घोष ने अपने संसदीय भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा था, हम लड़ते हैं आपसे, संविधान हाथ में लेकर लड़ते हैं, हाथ में हमारे तलवार नहीं है सर. सयानी ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा था, 'भारत किससे तेल ख़रीदेगा कितने दिनों के अंदर ख़रीदेगा, किससे दोस्ती निभाएगा किससे दुश्मनी बरक़रार रखेगा, कोई और देश का राष्ट्रपति हमें ट्विटर पर आकर लेक्चर देता है और आप कहते हैं कि हम विरोध ना करें और हम चुप बैठे। 

सयानी अपने भाषणों में गीतों और शायरी का भी ख़ूब इस्तेमाल करती हैं. वो अक्सर संसद में अपनी शायरी के जरिए पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधती थी, लेकिन अब सियासी पाला बदलने के साथ ही उनके तेवर भी बदल गए हैं. अब उनके टारगेट पर सरकार नहीं बल्कि विपक्ष है. मॉनसून सत्र के दौरान मीडिया से बात करते हुए घोष ने विपक्ष को कठघरे में खड़ी करती नजर आईं हैं। 

कौन-कौन हुआ शामिल
एनडीए की इस बैठक में NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर चुके तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के कई सांसद शामिल हुए। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायनी घोष का नाम शामिल है। वही, भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचीं सुष्मिता देव समेत कई अन्य नेता भी बैठक में पहुंचे।

CM शुभेंदु अधिकारी से हो सकती है मीटिंग
पीटीआई भाषा के मुताबिक, अधिकारी मंगलवार को नई दिल्ली में उन 20 बागी सांसदों से दूसरी बार मिल सकते हैं, जो कम जानी-मानी पार्टी एनसीपीआई में शामिल हो गए थे। इस मुलाकात से इस संसदीय गुट के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, जिसमें भाजपा के साथ इसके संभावित विलय की बात भी शामिल है।

हालांकि, न तो एनसीपीआई और न ही भाजपा ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि मंगलवार की बैठक के एजेंडे में विलय शामिल है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अभी तक इन 20 बागी सांसदों के दल-बदल को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, हालांकि सदन में उनके बैठने की व्यवस्था बदल दी गई है।

बीरभूम की सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि बैठक एक बजे पश्चिम बंगाल सरकार के अतिथि गृह बंग भवन में होगी। रॉय ने कहा, 'हमारे कई सांसदों के पास कुछ जरूरी मामलों को लेकर सवाल हैं और वे उन पर स्पष्टीकरण चाहते हैं; वे इन मामलों को मुख्यमंत्री के सामने रख सकते हैं। साथ ही, उनके पास मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए कुछ मुद्दे और सुझाव भी हो सकते हैं।'