मुंबई
देश में 10 मिनट वाले क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सर्विस का यूज लगभग अब हर घर में होने लगा है, लेकिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर अब इन कंपनियों के ऊपर भी पड़ने वाला है. हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स को लागत बढ़ानी पड़ सकती है।
फ्यूल बढ़ोतरी का डिलीवरी पर असर
क्विक कॉमर्स में ऐवरेज डिलीवरी लागत 35-50 रुपये प्रति ऑर्डर है, जबकि फूड डिलीवरी में यह 55-60 रुपये के आसपास होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal (Zomato) के लिए ऐवरेज डिलीवरी लागत करीब 45 रुपये और Swiggy के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है. डिलीवरी लागत में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, यानी एक ऑर्डर पर 9-10 रुपये फ्यूल का खर्च आता है।
फिलहाल 4 प्रतिशत बढ़ोतरी से प्रति ऑर्डर 0.44 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर फ्यूल के दाम और बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर हो गए तो यह प्रभाव 1-1.2 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच सकता है. इससे कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर 4-12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है, अगर लागत ग्राहकों पर नहीं डाली गई।
Eternal और Swiggy पर क्या असर?
Eternal (जिसमें Blinkit शामिल है) और Swiggy दोनों ही फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर निर्भर हैं. FY27 में Eternal के करीब 2.7 अरब और Swiggy के 1.4 अरब ऑर्डर आने का अनुमान है. Swiggy पर असर ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह अभी क्विक कॉमर्स में ब्रेकईवन यानी नो प्रॉफिट, नो लॉस की राह पर है।
दूसरी ओर, Eternal की स्थिति बेहतर मानी जा रही है. उसका बड़ा स्केल, ज्यादा एड आय और प्रीमियम ग्राहक आधार इसे लागत बढ़ाने में मदद करेगा. कंपनियां अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक चार्ज बढ़ाकर, कुछ खुद उठाएंगी और कुछ डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव डालकर संभालने की कोशिश करेंगी।
ग्राहकों और डिलीवरी वर्कर्स पर प्रभाव
बढ़ती लागत से 10 मिनट डिलीवरी का कन्वीनियंस महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियां डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज बढ़ा सकती हैं. डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कमाई प्रभावित होने से वे ज्यादा पेमेंट की मांग कर सकते हैं, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा।
हालांकि, एलारा कैपिटल का कहना है कि थोड़े समय बाद यह कंट्रोल में रहेगा. लंबे समय में कंपनियां दक्षता बढ़ाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाकर और बेहतर प्लानिंग से इस चुनौती से निपट सकती हैं. फ्यूल दामों में बढ़ोतरी अब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती बनकर आ रही है।

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