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कुलपति चयन समिति में होगा राज्य शासन का भी प्रतिनिधि

जबलपुर

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कुलपति चयन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किए जाने की तैयारी है। अब राजभवन के साथ ही साथ राज्य शासन का प्रतिनिधि भी कुलपति चयन कमेटी में शामिल किए जाएंगे। इस व्यवस्था से राजभवन का कुलपति चयन में एकाधिकार खत्म हो जाएगा। वहीं राज्य शासन भी अपनी पंसद का कुलपति विश्वविद्यालयों में नियुक्त कर पाएगा।

इस संबंध में एक प्रस्ताव विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 101 वीं बैठक में चर्चा के लिए प्रस्तावित है। जिसके तहत कुलपति की नियुक्ति हेतु गठित की जाने चयन समिति में राज्य शासन का प्रतिनिधि नामांकन का प्रस्ताव। पूर्व में बैठक आज 22 सिंतबर को होनी थी,लेकिन वीआइपी मूमेंट के चलते बैठक टल गई । बैठक में प्रदेश के समस्त शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी बुलाया गया है। समन्वय समिति की बैठक के पूर्व उक्त प्रस्ताव को स्थाई समिति के समक्ष रखा गया था। इसके अलावा बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के संबद्धता शुल्क में वृद्धि के अनुमति संबंधी प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी।

श्रमसाध्य भत्ते पर निगाहें
समन्वय समिति बैठक में विवि तथा विवि परीक्षाओं के संचालन में दिए जा रहे श्रमसाध्य भत्ते के संबंध में पुनर्विचार किया जाना है। श्रमसाध्य को लेकर विश्वविद्यालयों में अलग- अलग व्यवस्थाएं चल रही हैं। किसी विवि में समस्त कर्मचारियों को श्रमसाध्य दिए जाने की व्यवस्था है तो कहीं केवल परीक्षा एवं गोपनीय विभाग में पदस्थ कर्मचारियों को श्रमसाध्य दिया जा रहा है। श्रमसाध्य को लेकर चल रही खींचतान को देखते हुए सभी विश्वविद्यालयों में एकरूपता लाने के लिए उक्त प्रस्ताव समन्वय समिति में रखा गया है।