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सामाजिक संस्था भोज जागरूक महिला मंडल सोसायटी द्वारा मिलेट्स पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

धार
 सामाजिक संस्था भोज जागरूक महिला मंडल सोसायटी और मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद से नगर विकास प्रस्फुटन समिति बनियावाडी द्वारा आम जनता में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मिलेट्स पर एक दिवसीय कार्यशाला शासकीय पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक बालक छात्रावास में आयोजित की ।

जिसमें विशेष अतिथि के रूप में धार नर्सिंग कॉलेज सीईओ मोनिका चौहान उपस्थित रही ।प्रियामाहेश्वरी के मुख्य आतिथ्य में कार्यशाला संपन्न हुई । मोनिका चौहान ने सबसे पहले तो युवा वर्ग को मिलेट्स से परिचित करवाया कि छोटा व मोटा अनाज जैसे ज्वार , बाजरा , रागी , कोदो , कुटकी , सावा आदि को मिलेट्स के नाम से जाना जाता है । प्राचीन समय में मिलेट्स का ही उपयोग होता था लेकिन जैसे-जैसे हम पाश्चात्य संस्कृति की ओर अग्रसर होते गए वैसे वैसे मिलेट्स से दूर होते चले गए । व हरित क्रांति आने के बाद हमने गेहूं और चावल को ही अपना मुख्य भोजन बना लिया ।

प्रिंसिपल प्रियामाहेश्वरी ने बताया कि मिलेट्स पहले सस्ता उपलब्ध हो जाता था  लेकिन आज यह बहुत महंगा हो गया है ।मिलेट्स का उपयोग करके हम हर बीमारी से दूर रह सकते हैं । गेहूं और चावल में ग्लूटेन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जिसके कारण हमारे पाचक तंत्र पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है जिससे हमारा भोजन जल्दी पचता नहीं है और कब्ज तथा मोटापा जैसी समस्या पैदा हो जाती है । दिल के मरीज व मोटापे से ग्रसित लोगों को पॉजिटिव ग्रेन अर्थात मिलेट्स का उपयोग दिन में कम से कम एक बार आवश्यक रूप से करना चाहिए । इनमें फाइबर , विटामिंस , मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं । सामाजिक कार्यकर्ता अब्बास अली ने कहा कि कंगनी में फाइबर व प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है ।

नर्वस सिस्टम के लिए कंगनी को सुपर फुड माना जाता है । हड्डियों का दुखना , खून की कमी , मोटापे में मिलेट्स बहुत उपयोगी हैं । कुटकी से डायबिटीज अर्थात शुगर को रिवर्स किया जाता है । शुगर व दिल के मरीजों के लिए कुटकी बहुत उपयोगी है । इसमें विटामिंस व मिनरल्स बहुतायत में मिलते हैं । सावा में प्रोटीन , आयरन भरपूर मात्रा में मिलता है । इसका हम चावल के रूप में उपयोग कर सकते हैं ।

कोदो ब्लड प्यूरीफायर का काम करता है । सभी मिलेट्स लगभग एक जैसे दिखते हैं । थोड़ा-थोड़ा कलर में अंतर दिखाई देता है । प्रदीप जोशी ने कहा प्रोसो में कार्बोहाइड्रेट , मैग्नीशियम , प्रोटीन , फाइबर , फास्फोरस , विटामिन बी6 व आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है ।

प्रोसो में फाइबर की मात्रा ज्यादा होने के कारण हमें भूख जल्दी-जल्दी नहीं लगती है और हम मोटापे से दूर रहते हैं । मिलेट्स को कम से कम 5 – 6 घंटे भीगोकर जरूर रखना चाहिए । कम से कम चार-पांच दिन एक तरह का मिलेट्स ही उपयोग करना चाहिए फिर हम दूसरा मिलेट्स ले सकते हैं । सभी बीमारियों का इलाज मिलेट्स में समाहित है । योग के लिए समर्पित जगदीश शर्मा व आर सी कश्यप ने सभी युवा वर्ग को योग के लिए प्रेरित किया । कार्यक्रम का संचालन भोज जागरूक महिला मंडल सोसाइटी से मीना अग्रवाल ने किया व आभार इशिका मुकाती ने माना ।